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बीजू बुनकर का जादू – Biju Spins Some Magic Hindi

Author: Jaya Jaitly Illustrator: Bhramara Nayak

Text and Images from बीजू बुनकर का जादू

बीजूके कान म एक मखी भनभना रही थी। आँख5 म सूरज क तलमली पड़ रही थी और पास क झपड़य म‘तूही, तूही’ गातेचरखेबीजूको जैसेलोरी देरहेथे। अपनेसाथ बैठेभूरेकुको देख कर बीजू नेसोचा य न दोन जन कुछ देर ऊँघ ल। लेकन भूरा अपनेजीभ बाहर कए गम के मारेइतनी ज़ोर सेहाँफ रहा था क बेचारे बीजूक नद हवा हो गई।

गाँव के अधकतर बIच क तरह बीजूभी Jकूल नह जाता था। उसका Jकूल जानेको तो
बLत मन था लेकन माँ-बापा कहतेथे6क बुनकर5 को पढ़ाई सेयादा बुनाई आना ज़री ह।
कभी-कभी वह भी ऑ6फ़स मनौकरी करनेको लेकर ख़याली पुलाव पकाता था। फर सोचता
क पीठ पर कताब5 का बोझा लए Jकूल जानेवालेबIचेकौन सेबत खुश दखाई देतेथे!

यही कह बीजूखुद को सांवना Tदया करता था। उसके दोJत का बड़ा भाई भी तो कूल गया था और फर आगेपढ़कर डW भी लेआया था। ले6कन फर, फर आ या? मुंबई क ऊँची इमारत मकतनेही दYतर मजा-जाकर जूतेचटखाए, नौकरी के Sलए हाथ-पैर जोड़े। नौकरी मली-ले6कन चाय क ‘कान या अख़बार के ठेलेपर, या फर चौकदारी क। हार कर वह गाँव लौट आया। अब वह अपनेबापा केसाथ इ1कत क साड़ी बुनता हैऔर कभी-कभी थोक के पारय5 को अपना माल बेचनेमुंबई जाता ह।

<end of sample>

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बीजू बुनकर का जादू English version below:

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