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फ़िलॉटस मेंढक का साहसिक सफ़रनामा – The Adventures of Philautus Frog Hindi

Author: Kartik Shanker Illustrator: Maya Ramaswamy Translator: Madhubala Joshi

Text and Images from – फ़िलॉटस मेंढक का साहसिक सफ़रनामा Hindi

 

फ़लॉटस जसेकुछ दोत पात बग के नाम सेभी जानतेह,
उसका परवार पछलेसैकड़$ साल$ सेबड़ेपेड़ सेनीचेही नह उतरा।
फ़लॉटस जसे(यार सेउसके दोत *मढकूकहतेथ, पैदा होनेके बाद से,
ज़दगी मकभी भी बड़ेपेड़ सेनीचेनह उतरा था। उसके पता, माँ, दादा-दाद
और यहाँतक क परदादा-परदाद भी कभी बड़ेपेड़ सेनीचेनह उतरेथे।
और उनसेपहले? उनसेपहलेक बात तो कोई नह& जानता।
मढकूके परवार को तो बस यही याद हैक वेलोग सदा सेउसी
बड़ेपेड़ पर रहतेआए ह। वह उसी पेड़ केछेद मइकट्ठा ए पानी
मपैदा आ था, और जब वो बत छोटा था तो उसी
पानी मछप-छप करता घूमता था। उससेपहले
उसके पता भी ऐसेही पानी मछपछपातेथे।

कभी-कभी सरेमढक उसका इस बात पर मज़ाक उड़ातेथे
क वो तो कभी बगची (टैडपोल, मढक का नही मछली जैसा
Gदखनेवाला बIचा) बना ही नह& था। “तुम बगची नह& बने,
तुम तो बगची बनेही नह,” वेनारेलगाते। लेकन मढकूपेड़
पर रहनेवाला मढक था और उसेइस बात का गवLथा।

बड़ा पेड़ शोला के घनेअँधेरेऔर नमी भरेजंगल
के बीच$-बीच था, वहाँहमेशा ओस टपकती
और फफँूद क गंध भरी रहती थी।

<end of sample>

फ़िलॉटस मेंढक का साहसिक सफ़रनामा English Version below:

Philautus the tree frog known to his friends as Thavalai was born on the Big tree in the middle of a shola forest, a dark, deep and wet forest, dripping with dew, dank with mildew. His family had lived on a big tree for as long as anyone could remember and did not come down.

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