गूरा का लकड़हारा – The Woodcutter of Gura Hindi A story about a not so wise wood cutter who went to chop wood, he saw an olive tree and climb it sit on the branch then begun cutting the branch where he was seated. The moral of the story is, “A fool always finds one still more foolish to admire him!”
Author: Veena Seshadri, Illustrator: Greystroke
Sample text from गूरा का लकड़हारा
गरूा मएक लकड़हारा रहता था। एक दन सुबह वह लकड़ी लानेघर सेनकला। वह चलता गया , चलता गया और आ ख़र पचा नद कनारेजहाँएक वशाल जैतून का पेड़ था। लकड़हारा झट सेपेड़ पर चढ़ गया और उसक- सबसेबड़ी डाल केछोर पर आराम सेजा बैठा। फर उसनेअपनी कु4हाड़ी उठाई और उसी डाल को काटने लगा जस पर वह बैठा था। तभी गाँव का पं9डत वहाँसेगुज़रा। उसक- नज़र लकड़हारेपर पड़ी तो अचानक ;क गया ।
“अरेभलेमानुष!” पंडत नेपुकारा। “ यह या कर रहेहो? यह भी कोई तरीका हैलकड़ी काटनेका?” “लो! और कौन-सा तरीका होता है?” लकड़हारेनेजवाब दमा। “लकड़ी चाहए तो कुहाड़ी उठाओ और खट-खट-खट, लगेरहो।” “लेकन तुम गर कर मर जाओग, े” पंडत नेलकड़हारेको सावधान कया ।
लकड़हारेनेसोचा क पंडत मज़ाक कर रहा है। वैसेभी, लकड़हारा था अड़यल और आलसी, और उठ कर जगह बदलनेक- तकलीफ़ नह करना चाहता था। पंडत सर हलातेवहाँसेचला गया । और लकड़हारा ठIक अपनी जगह बैठा, खट-खटखट, कु4हाड़ी चलाता रहा।
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गूरा का लकड़हारा English Version below:
The Woodcutter of Gura – A folk tale from Ethiopia
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Very Nice Story.