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शहर में शेर – There’s a Lion on the Loose Hindi

Author: Paro Anand, Illustrator: Avishek Sen

 

Text and Images from शहर में शेर

 

सबके चेहरेपर रोते ए आसमान क झलक -दखनेलगी । फर भी बारश क नह । सब घर पर बैठेथ, उदास, ऊबे ए । “काश हमारेपास कुछ करनेको होता,” गीती ने अँगड़ाई लेते ए कहा । “हमारेसाथ कभी कोई मज़ेदार बात नह होती!” वक बोला ।

दरअसल ममी नेउह$बाहर बारश म$खेलनेसेमना कया था । मगर बच का मन बहलानेके लए उहनेगरमा-गरम, करारेपकौड़ेबना -दए । बच नेभी आलू, Fयाज़, पालक, गोभी वगैरह काटनेम$उनक मदद क ।

पकौड़ेसचमुच ब त Hवा-दI बनेथे। सबनेउह$गरमा-गरम, हरी चटनी केसाथ चटखारे लेकर खाया । पेट भर खानेके बाद भी जब पकौड़ेबच गए, तो ममी नेढक कर उह$मेज़ पर रख -दया ताक अगले-दन नाKतेके लए वेठडी लHसी केसाथ बासी रोटN और पकौड़ेखा सक।

“सोचो, इतनी बारश म$पश-ुप या करतेहगे?” गीती नेकहा ।

“या करतेहग? पजड़ेम$बैठेरहतेहग, और या?”

<end of sample>

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शहर में शेर English Version below:

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