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शिकारी का साइकिल अभियान – Shakari’s Cycling Adventure Hindi

Author: Payoshni Saraf, Illustrator: Allen Shaw

Text and Images from शिकारी का साइकिल अभियान

 

शकारी ने महावालय से नातक करने केबाद खेल सामी क कान म काम कया। इस काम म वह त रहता था लेकन वह इससे ऊब गया था। वह खेल खेलने केलए लालायत रहता था और हमेशा साहसक काम करने का सपना देखा करता था। शकारी को ऐसा लगता था क उसक जदगी ठहर सी गई है। एक दन शकारी ने रेडयो पर कुछ सुना। “भारत एशयाई खेल क मेज़बानी कर रहा है।”

दली! शकारी ने सोचा, “म कभी भी दली नह गया ँ और मुझे खेल देखने जाना चाहए।” उसकेदमाग म एक शानदार वचार आया। रोमांचकारी अभयान पर जाने का वचार। साइकल चलाने का रोमांचकारी अभयान! “या हो अगर म साइकल चलाकर दली जाऊँ? मने कभी भी इतनी र तक साइकल नह चलाई है। नए शहर और कब से गुजरते ए याा करना रोमांचक होगा।” उसके दोत रचडने इस याा केलए उसे अपनी साइकल द।

शकारी ने अपने माता-पता क अनुमत माँगने केलए उह एक प लखा। पहले वे हचकचा रहे थे। यह बत ही लंबी याा थी और उस समय कोई भी मोबाइल फोन नह होता था। लेकन उसके उसाह को देखते ए उहने उसे अनुमत देद।

शकारी ने अयास करना शु कर दया। वह हर हते २० क.मी. दौड़ता था। वह हर हते ७० क.मी. साइकल चलाता था। अपनी मांसपेशय को मजबूत बनाने केलए वह ायाम करने लगा। वह रोज़ फल, मेवा और पनीर खाता और ध पीता था। उसने हका लेकन समझदारी से अपना सामान बाँधा। उसने एशयाई खेल केलए टकट खरीदे। उसने अपनी याा केमाग का एक नशा बनाया। अब शकारी इंतज़ार नह कर सकता था! अंतत: वह तैयार हो गया।

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